Sunday, September 27, 2026

चराग

 

फोटो क्रेडिट - सोनल इनामदार

शाम की गोद में कुछ ख्वाब ठहरे हुए हैं,

दरख्तों के साये में अरमान ठहरे हुए हैं।

हवा छू के गुजरती है पत्तों को यूँ,

जैसे कोई भूली हुई बात कहती हो यूँ।

ये तन्हा चराग भी क्या खूबसूरत है,

अँधेरों में जैसे कोई उम्मीद बाकी है।

न कोई सदा है, न कोई गुफ्तगू है,

मगर हर तरफ एक अजीब-सी खुशबू है।

मैं ठहरा तो जाना इस राह-ए-हयात में,

सुकूँ भी छुपा है कभी खामोशी में।

ये जंगल, ये साये, ये रोशन चराग,

जैसे खुद से मिलने का हो एक फराग।

कभी रात गहरी हो, डरना नहीं तुम,

"अवल" ये चराग जलता रहेगा।