Thursday, February 5, 2026

सजदा


करते नहीं, शायरी हो जाती है आगे आगे
देखेंगे क्या ग़ज़ल, होती है आगे आगे

इतना ना करो गुरूर, ए हस्ती हम पे,
फ़ना की राह है, सालिक चले आगे आगे

ज़ख़्म भी सज्दा करते हैं, दर ए इश्क़ पे,
हर दर्द बन जाता है, सजदा आगे आगे

मत कर तारीफ़, ये फ़ानी जिस्म की,
रूह का समंदर है, दीदार आगे आगे

पी ली मय ए इश्क़, हमने ख़ामोशी में,
होश जाता रहा, वजूद मिटता रहा आगे आगे

दीदार-ए-यार तो, हो ही चुका 'अवल',
बस रब मिलता है, बंदा खोता है आगे आगे
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