करते नहीं, शायरी हो जाती है आगे आगे
देखेंगे क्या ग़ज़ल, होती है आगे आगे
इतना ना करो गुरूर, ए हस्ती हम पे,
फ़ना की राह है, सालिक चले आगे आगे
ज़ख़्म भी सज्दा करते हैं, दर ए इश्क़ पे,
हर दर्द बन जाता है, सजदा आगे आगे
मत कर तारीफ़, ये फ़ानी जिस्म की,
रूह का समंदर है, दीदार आगे आगे
पी ली मय ए इश्क़, हमने ख़ामोशी में,
होश जाता रहा, वजूद मिटता रहा आगे आगे
दीदार-ए-यार तो, हो ही चुका 'अवल',
बस रब मिलता है, बंदा खोता है आगे आगे
---
No comments:
Post a Comment